उत्तर प्रदेश के वाराणसी में लगभग 183 दिनों के बाद रविवार को प्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर भक्तों के लिए खोल दिया गया। कोरोना गाइडलाइन के अनुसार ही भक्त यहां दर्शन कर रहे हैं। सरकार के नियमों का प्रशासन द्वारा पालन कराया जा रहा है। दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मास्क और सोशल डिस्टेंस का पालन कराते हुए मंदिर में प्रवेश कराया जा रहा है।
इसके साथ हर श्रद्धालु को मंदिर में प्रवेश के पहले टनल से होकर गुजरना पड़ रहा है। हालांकि कोर्ट ने टनल पर रोक लगाई है। फिर भी मंदिर प्रशासन द्वारा टनल से श्रद्धालुओं को प्रवेश कराया जा रहा है।मंदिर सुबह 6 बजे से 10.30 बजे तक और शाम 3 बजे से 7.30 बजे तक भक्तों के लिए खोला गया है।
माला, फूल और प्रसाद नहीं ले जा सकते
भक्तों को प्रसाद और फूल माला ले जाने पर रोक लगी है। इसके साथ 10 की संख्या में भक्तों को मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर पहले ही खुल चुका था, पर संकटमोचन का दरबार बन्द था। श्रद्धालु राजन तिवारी ने बताया कि संकटहरण हनुमानजी कोरोनाकाल में सभी की रक्षा करें, यही कामना हैं।
भक्त विनोद पाल ने बताया कि हम लोग रोज प्रभु के चौखट तक आते थे और मत्था टेक पूछते थे कि कब दर्शन देंगे। प्रभु का दरबार देखकर मन प्रसन्न हो गया। अनुज केसरी ने बताया कि यहां लोग सुबह भगवान के दर्शन पूजन के बाद ही कार्य शुरू करते हैं। संकट मोचन बाबा तो दुखों से उबारते हैं। पूरा विश्व जिस महामारी से जूझ रहा है उससे प्रभु मुक्ति दिलाए।
9 जून को काशी के 9 धार्मिक स्थल खोल दिये गए थे
इससे पहले लॉकडाउन की सख्ती के बीच 20 मार्च से काशी विश्वनाथ मंदिर, काल भैरव मंदिर, पर्यटन स्थल सब बंद थे। 9 जून विश्वनाथ मंदिर का पट खोल दिया गया था। जबकि काशी में कुल 9 धर्म स्थलों को 9 जून को खोलने के आदेश दिए गए थे। बाबा विश्वनाथ के दरबार के अलावा 8 धर्मस्थलों में अन्नपूर्णा मंदिर, बृहस्पति भगवान मंदिर, तिलभांडेश्वर, शुलकंटेश्वर, केदार मंदिर, किनाराम मठ, नदेसर मस्जिद, गुरुद्वारा नीचीबाग खोल दिया गया था।
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