गोरखपुर जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर छितौना गांव है। यहां रहने वाले दिनेश कुमार यादव 8वीं पास हैं। साल 1993 में रोजी रोटी की तलाश में बंबई (मुंबई) चले गए। उसके बाद साल 2005 तक दिल्ली में रहे। दिनेश कुमार के हाथों के हुनर ने उन्हें कभी बेरोजगार रहने नहीं दिया। वे शीशे में डिजाइन बनाते थे। काम अच्छा चल रहा था। लेकिन गांव की बदहाली उनके मन को परेशान कर रही थी। ऐसे में वे एक दिन गांव आकर प्रधान के कामचोरी की बात कुछ रिश्तेदारों से करने लगे। चूंकि प्रधान रिश्तेदार ही था, इसलिए लोगों ने उन्हें चुप करा दिया। लेकिन दिनेश ने उखड़े मन से कहा कि यदि वे (प्रधान) काम नहीं करेंगे तो मैं खुद चुनाव लड़ जाऊंगा। यह बात सुनकर लोग हंसने लगे। कहने लगे कि तुम्हे कौन वोट देगा? 12 साल तो परदेश में रहे हो।
यह बात दिनेश को नागवार गुजरी। उन्होंने साल 2005 में पत्नी रेशमी देवी का नामांकन कराया और महज 15 दिनों के भीतर 19 वोट से चुनाव जीत लिया। इसके बाद दिनेश व उनकी प्रधान पत्नी ने एक प्लान के तहत गांव का विकास कराया। वर्तमान में यह गांव नजीर बन चुका है।
डेढ़ साल में कोई क्राइम रिकॉर्ड नहीं
रेशमी देवी लगातार तीन बार चुनाव जीत चुकी हैं। उनके पति दिनेश कुमार प्रधान प्रतिनिधि हैं। इस गांव में मूलभूत सुविधा सड़क, पानी, मकान की अव्वल दर्जे की व्यवस्था। देशक्ति का यहां अनूठा रंग नजर आता है। सार्वजनिक संपत्तियों को तिरंगे के रंग में रंगा गया है। सीसीटीवी से लैस इस गांव में पिछले डेढ़ साल में कोई क्राइम भी रिकार्ड नहीं किया गया।
गांव में 295 परिवार, घर-घर पानी की सप्लाई
मुख्यालय से सटे छितौना गांव की आबादी तकरीबन 1450 की है। तकरीबन 295 के आसपास यहां पर आवास हैं। इस गांव में मॉडल सामुदायिक शौचालय बनवाए गए हैं। पेड़ पौधों के साथ सार्वजनिक संपत्तियों पर देशभक्ति का स्लोगन लिखा गया है। जल निगम के जरिए पानी की टंकी बनवाई गई है। जिसके जरिए घर-घर पानी की सप्लाई है। सीसीटीवी 24 घंटे चले, इसलिए इनवर्टर की सुविधा है।
3.53 करोड़ रुपए की परफार्मेंस ग्रांट स्वीकृत
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा कि, केंद्र सरकार ने 3.53 करोड़ रुपए की परफार्मेंस ग्रांट स्वीकृत की है। इस बार आरओ प्लांट, फौव्वारा आदि का निर्माण कराया जाएगा। आगे इसमें और अच्छे से काम किया जाएगा, ताकि यह पूरे प्रदेश के लिए नजीर बन जाए।
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