हाथरस में दलित युवती के साथ कथित बलात्कार और उसकी मौत के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच हाथरस से भाजपा सांसद राजवीर दिलेर की बेटी और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की पूर्व सदस्य मंजू दिलेर का एक लेटर वायरल है। यह लेटर 19 सितंबर को सूबे के डीजीपी एचसी अवस्थी को लिखा गया था। जिसमें मुख्य आरोपी संदीप के अलावा रवि, रामू व लवकुश को रेप का दोषी बताया गया था। कहा जा रहा है कि इसी लेटर के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई थी। 22 सितंबर को सीओ ने जब पीड़ित का बयान लिया तो गैंगरेप का मामला खुलकर सामने आया था।
क्या लिखा है कि लेटर में? कितना असर हुआ?
मंजू दिलेर ने लेटर में लिखा है कि पीड़ित बाल्मीकि जाति से हैं। 14 सितंबर को पीड़ित की बहन के साथ बूलगढ़ी गांव के रहने वाले सवर्ण जाति के संदीप, रवि, रामू व लवकुश ने बलात्कार किया और जान से मारने की कोशिश की। इतने में मां ने उसे आवाज लगाई, जिस कारण आरोपी उसे बेहोशी हालत में खेत में छोड़कर भाग गए। जिसका इलाज वर्तमान में अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। आरोपी पहले से पीड़ित परिवार के साथ रंजिश मानते हैं। घटना को छह दिन बीत गए हैं, लेकिन थाना पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं हुई है। घटना में पांच लोग शामिल थे, लेकिन थाना पुलिस द्वारा केवल एक ही व्यक्ति के नाम रिपोर्ट दर्ज की गई है। जो सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं, ऐसे एसएचओ को निलंबित किया जाए।
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शुरुआत में पहला मुकदमा आईपीसी की धारा 307 व एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ था। लेकिन 19 सितंबर को पुलिस ने इसमें 354 की धारा बढ़ाई। फिर 22 सितंबर को सीओ द्वारा बयान लेने के बाद इसमें धारा 376डी (गैंगरेप) बढ़ाई।
सांसद ने कहा- हम जातिवाद की राजनीति नहीं करते
सांसद राजवीर दिलेर का कहना है कि मैं और मेरी बेटी जातिवाद की राजनीति नहीं करते। पीड़िता के परिजनों ने मंजू को यह सब बताया था और उसे पत्र दिया था। उसके बाद उसने कार्यवाही के लिए यह पत्र दिया।
सांसद व उनकी बेटी ने निर्दोषों को फंसाया
आरोपियों के पक्ष का कहना है कि सांसद व उनकी पुत्री जातिवाद की राजनीति करते हैं। पीड़िता उनकी जाति की थी, इसलिए उन्होंने निर्दोषों को फंसाया है। उन्होंने अपनी बिरादरी को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया है। हाल ही में राजवीर दिलेर जेल में किसी से मुलाकात करने गए थे, जहां चारों आरोपी बंद हैं। जेल में उनकी जान को भी खतरा है।

क्या है पूरा मामला?
हाथरस में 14 सितंबर को 4 लोगों ने 19 साल की दलित युवती से कथित गैंगरेप किया था। आरोपियों ने युवती की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और उसकी जीभ भी काट दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़ित की मौत हो गई। मामले में चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि दुष्कर्म नहीं हुआ था। मंगलवार को सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफनामे में भी रेप न होने की बात कही गई है।
योगी सरकार मामले की जांच SIT से करवा रही है। CBI जांच की सिफारिश भी की है। पीड़ित का शव जल्दबाजी में जलाने और लापरवाही के आरोपों के बीच हाथरस के एसपी समेत 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए हैं।
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