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उत्तर प्रदेश में सात सीटों पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को उन्नाव से पूर्व सांसद अन्नू टंडन ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अन्नू टंडन ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया है। टंडन ने पार्टी की नीतियों पर नाराजगी जताई। चर्चा है कि अन्नू टंडन सपा जॉइन कर सकती है। हालांकि उन्होंने सोच समझकर फैसला लेने की बात कही है।टंडन के अलावा उत्तर प्रदेश यूनिट के 50 नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी है। कुछ दिन पहले यूपी महासचिव बनाए गए अंकित परिहार जैसे युवा नेता भी शामिल हैं।

बता दें कि अन्नू टंडन 2009 में उन्नाव से सांसद रही हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में अन्नू टंडन चौथे स्थान पर रहीं तो 2019 के चुनाव में वे तीसरे स्थान थीं। उन्नाव की बांगरमऊ सीट पर उपचुनाव हो रहा है। ऐसे में उपचुनाव से ठीक पहले अन्नू टंडन का पार्टी छोड़ना बड़ा नुकसान माना जा रहा है।


छह माह पहले से पार्टी के कार्यक्रमों से बना ली थी दूरी

पूर्व सांसद अन्नू टंडन ने बीते 6 महीने से प्रदेश कांग्रेस कमेटी व पार्टी के अन्य कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी। कुछ दिनों से अन्नू टंडन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत व उनके संपर्क करने पर भी उनसे मुलाकात नहीं की। गुरुवार सुबह ट्वीट कर अन्नू टंडन में अपने इस्तीफे की जानकारी दी। ट्वीट में अंग्रेजी और हिंदी के दो पत्र अनु टंडन ने भी पोस्ट किए हैं।

अन्नू टंडन ने लिखा- कांग्रेस पार्टी से विश्वास मेरा टूट कर बिखर गया

पूर्व सांसद अन्नू टंडन ने पत्र में लिखा कि, दुर्भाग्यवश प्रदेश नेतृत्व के साथ कोई तालमेल न होने के कारण मुझे कई महीनों से काम या उनसे कोई सहयोग नहीं मिल पा रहा। 2019 का चुनाव हारना मेरे लिए इतना कष्ट दायक नहीं रहा, जितना पार्टी संगठन की तबाही और उसे भी करते हुए देख कर रहा है। प्रदेश के नेता सोशल मीडिया मैनेजमेंट और व्यक्तिगत ब्रांडिंग में इतने लीन हैं कि पार्टी व मतदाता के बिखर जाने का उनका कोई इल्जाम नहीं है। मेरे नेक इरादों के बावजूद मेरे सहयोगियों व मेरे बारे में कुछ चुनिंदा व अस्तित्व विहीन व्यक्तियों द्वारा झूठा प्रचार सिर्फ वाहवाही के लिए किया जा रहा है। उससे मुझे अत्यंत कष्ट का अनुभव हुआ और तकलीफ तब ज्यादा होती है जब नेतृत्व द्वारा उनके रोकथाम के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जाता है। इन सारी वजहों के बावजूद मैं कई महीनों से पार्टी में बनी रही। इस उम्मीद से कि शायद प्रदेश के सुंदर भविष्य के लिए अच्छे और काबिल नए नेतृत्व को प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

मेरी वार्ता ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी महासचिव/उत्तर प्रदेश के प्रभारी प्रियंका गांधी से भी हुई। कोई भी आगे रास्ता जो सबके हित में नहीं निकल पाया। भगवान की दया से व्यक्तिगत व सामाजिक स्तर से मुझे बहुत कुछ मिला। अतः पद का कोई प्रलोभन मुझे अब तसल्ली नहीं दे सकता। कांग्रेस पार्टी से विश्वास मेरा टूट कर बिखर गया और मैं पार्टी के प्रदेश के संगठन के साथ अपने उन्नाव वासियों पर देश की सेवा करने में असमर्थ महसूस करती हूं। आज राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना त्यागपत्र मैंने भेज दिया है।



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अन्नू टंडन 2009 में उन्नाव से सांसद रही हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में अन्नू टंडन चौथे स्थान पर रहीं तो 2019 के चुनाव में वे तीसरे स्थान थीं। उन्नाव की बांगरमऊ सीट पर उपचुनाव हो रहा है। ऐसे में उपचुनाव से ठीक पहले अन्नू टंडन का पार्टी छोड़ना बड़ा नुकसान माना जा रहा है


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