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पटना, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। कोरोना काल में हो रहे बिहार विधानसभा चुनाव में कई बदलाव दिख रहे है। इधर, कई राजनीतिक दल भी सत्ता तक पहुंच बनाने के सपने संजोए नई राह पर चलकर अपनी मंजिल तक पहुंचने में जुटे हैं, जिसे लेकर सभी दल जोर आजमाइश कर रहे हैं।

यही कारण है कि कई नए गठबंधनों का उदय हुआ है और सभी गठबंधनों ने अपने-अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी तय कर दिए हैं। वैसे, कहा जा रहा है कि चुनाव में मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेतृत्व वाले गठबंधन में ही है।

कहा जा रहा है कि इस चुनाव में महागठबंधन को छोड़कर राजग के साथ आए हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के कुछ क्षेत्रों को छोड़ दें, तो राज्य के अन्य क्षेत्रों में इनका प्रभाव नहीं के बराबर है।

कहा जा रहा है कि छोटे दल भले ही गठबंधन बनाकर चुनावी मैदान में उतर आए हों लेकिन उनकी क्षमता वोटकटवा से ज्यादा कुछ नहीं है।

पटना के वरिष्ठ पत्रकार और बिहार की राजनीति को जानने वाले मनोज चौरसिया भी कहते है कि छोटे दलों की भूमिका इस चुनाव में कहीं नजर नहीं आ रही है। उन्होंने हालांकि यह भी माना कि राजग से अलग हटकर बिहार में चुनाव लड़ रहे लोक जनशक्ति पाार्टी (लोजपा) कई क्षेत्रों में इस चुनाव को प्रभावित करेगा।

उन्होंने माना कि अन्य छोटे दल गठबंधन के जरिए भले ही चुनावी मैदान में हैं, लेकिन कई ऐसे दल भी हैं, जिनकी कोई पहचान बिहार में नहीं है।

इस चुनाव में राजग में शामिल वीआईपी 11 सीटों पर, जबकि हम सात सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दोनों पार्टियां लोकसभा चुनाव में तीन सीटों पर चुनाव लड़ी थी और सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। वीआईपी को दो प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे।

इधर, इस चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) महागठबंधन से अलग होकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) सहित छह राजनीतिक दलों ने मिलकर ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट (विराट लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष मोर्चा) के तहत चुनाव लड़ रही है।

इधर, पूर्व सांसद पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी भी आजाद समाज पार्टी सहित कई दलों के साथ प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन के तहत चुनाव मैदान में है। लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव अपनी लोकसभा सीट नहीं बचा सके थे।

वैसे, पिछले दिनों पप्पू यादव ने क्षेत्र में काफी मेहनत की है। राजनीतिक समीक्षक संतोष सिंह भी कहते हैं कि छोटे दल अपनी संभावना भले ही नहीं बना सकें लेकिन दूसरे की संभावनाओं को क्षीण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव की जाप, ओवैसी की एआईएमआईएम की कुछ क्षेत्रों में पकड़ है, लेकिन पूरे राज्य में परिणाम प्रभावित करेंगे, ऐसी संभावना नहीं है।

इधर, लोजपा भी 143 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। दूसरे राज्यों में सत्ता का स्वाद चखने वाले क्षेत्रीय दलों का बिहार की राजनीति में कभी भी अधिक नहीं दखल नहीं हो सका। इस चुनाव में स्थिति बहुत अधिक बदलेगी, ऐसी उम्मीद नहीं है।

एमएनपी-एसकेपी



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Small parties will prove to be a vote cut in Bihar
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