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उत्तर प्रदेश में सात माह बाद सोमवार से स्कूल खुल गए। कोविड-19 संक्रमण के चलते 13 मार्च से स्कूल बंद थे। अभी कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाओं के संचालन की अनुमति सरकार दी गई है। सुबह 8:50 बजे से दोपहर 11:50 बजते तक कक्षा एवं 10 और 12:20 से 3:20 बजे तक कक्षा 11 और 12 की कक्षाएं चलाई जाएंगी। आज पहले दिन सीमित संख्या में छात्र स्कूल पहुंचे। इन बच्चों को स्कूल भेजने की सहमति उनके अभिभावकों ने दी थी। बच्चों ने कहा कि जो पढ़ाई स्कूल में हो सकती है, वो वीडियो कॉल या ऑनलाइन संभव नहीं है। स्कूल खोलने का निर्णय अच्छा है। इस दौरान बच्चे अपने-अपने दोस्तों से मिलकर काफी उत्साहित नजर आए। राजधानी लखनऊ के दो स्कूलों की रिपोर्ट...

मास्क में नजर आए बच्चे

सीतापुर रोड स्थित मड़ियांव में बाल निकुंज इंटर कॉलेज एक सरकारी स्कूल है। यहां आने वाले बच्चे मास्क में नजर आए। वहीं, स्कूल प्रशासन ने पूर्व में ही परिसर व कक्षाओं की साफ-सफाई करा ली थी। सैनिटाइजेशन भी कराया गया। सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए सुबह बच्चों को स्कूल परिसर में एंट्री दी गई।

सिटी मांटेसरी स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था की गई।

हाथों को सैनिटाइज करने के बाद मिली एंट्री

स्टेशन रोड स्थित सिटी मांटेसरी स्कूल में थर्मल स्कैनिंग करने के बाद बच्चों से उनके अभिभावकों की अनुमति पत्र को जांचा गया। इसके बाद ही छात्र स्कूल में एंट्री पा रहे थे। इस दौरान 4-5 बच्चे बिना अपने अभिभावकों की परमिशन के बगैर पहुंचे थे तो उन्हें वापस घर भेज दिया गया। बच्चों ने कहा कि उनके अभिभावकों में कोरोना के संक्रमण को डर जरूर है। लेकिन डर से कब तक यूं ही घर पर रहेंगे। हमें सावधानी बरतनी होगी।

छात्र बोले स्कूल आना अच्छा लगा, कोरोना ने धैर्य रखना सिखाया

  • छात्र मोहम्मद जाकिर ने कहा कि सात महीने के बाद स्कूल आना मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और क्लासेस शुरु हो गई हैं। ऑनलाइन क्लासेस से कहीं न कहीं कंफ्यूजन दूर नहीं हो पाता है। स्कूल आने से बहुत अच्छा फील हो रहा। कोरोना महामारी में मैंने धैर्य रखना सीखा।
  • सिटी मांटेसरी स्कूल के छात्र राहुल अग्रवाल ने कहा कि स्कूल आकर पढ़ना ऑनलाइन क्लासेस से अच्छा है। कई डाउट होते हैं, वे स्कूल में क्लियर हो जाते हैं। वीडियो कॉल में ऐसा संभव नहीं है। मेरे क्लास में 40 बच्चे हैं। मगर अभी 2 बच्चे ही आए हैं।
  • छात्र रिफा आरिफ ने कहा कि घर में रहकर रूटीन सब चेंज हो गया था और स्टडीज में भी बहुत चेंज हुआ है। स्कूल में आना अच्छा लग रहा है। अभी बहुत कम बच्चे आए हैं। लेकिन धीरे-धीरे सब सामान्य हो जाएगा।
  • अलीगंज के सीएमएस स्कूल के छात्र अभिनव सक्सेना ने कहा कि पहले से तो डर लग रहा था कि 7 महीने बाद स्कूल आएंगे क्या व्यवस्था होगी क्या नहीं? लेकिन आने के बाद अच्छा लग रहा है और कोई डर भी नहीं है।
  • आयुष त्रिपाठी ने कहा कि ऑनलाइन क्लासेस में 6 से 7 घंटे मोबाइल में लगे रहने से कहीं ना कहीं आंखों को बड़ी दिक्कतें आ रही हैं। आज स्कूल आए हैं। आज मैंने बहुत दिनों बाद अपने टीचरों से आमने-सामने बात की, अच्छा लग रहा है।
सिटी मोंटेसरी स्कूल की प्रिंसिपल वेरा हजेला।

प्रिंसिपल ने कहा- कोविड से बचाव के सारे इंतजाम

सिटी मोंटेसरी स्कूल की प्रिंसिपल वेरा हजेला ने कहा कि चार बच्चे बिना अनुमति पत्र के आए थे, उन्हें घर भेज दिया गया है। बताया कि सरकार द्वारा स्कूल खोलने के निर्णय के बाद ऑनलाइन तरीके से बच्चों के अभिभावकों से बात की थी। उन्हें स्कूल में कोरोनावायरस से बचाव के उपायों से अवगत कराया था। जिसके बाद कुछ अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सहमत हुए। अभी तो हमनें एक पाली की क्लासेस शुरु की है। दशहरे के बाद दोनों पाली में क्लास शुरु करेंगे। सोशल डिस्टेंसिंग का क्लास में पालन किया जा रहा है। सैनिटाइजेशन के बिना किसी को भी इंट्री नहीं दी जा रही है और थर्मल स्कैनिंग से बॉडी टेंपरेचर को चेक किया जाता है।



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यह फोटो लखनऊ में सिटी मांटेसरी स्कूल की है। यहां बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पढ़ाते टीचर।


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