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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में इस बार नवरात्रि के मौके पर कामाख्या मंदिर में ज्यादा भक्त नहीं दिख रहे हैं। महामारी के चलते लोग मंदिर में दर्शन से किनारा भी कर रहे हैं लेकिन इसका असर मंदिर के आसपास दुकान लगाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। वाराणसी में महाष्टमी के दिन भक्त मां कामाख्या का दर्शन पूजन करते हैं। शनिवार को कोरोना के चलते मंदिर में भीड़ नही दिखी।कामाख्या मार्ग पर सन्नाटा पसरा था। मंदिर के बाहर फूल माला की दुकानों पर भी इक्का दुक्का ही भीड़ दिखी।

फूल बेचने वाले छोटू ने बताया कि इस बार अष्टमी में बिल्कुल भीड़ नही हुई है। बाहर सड़क पर फल लगाने वाले मुन्नू भी परेशान दिखे। उसका भी कहना है कि भक्तों की भीड़ होती थी,तो दुकानदारी होती थी। इस बार पता ही नही चला कि नवरात्र है।मंदिर में दर्शन के लिये भोर में मंगला आरती के बाद ही पट्ट खोल दिया गया था।

कामाख्या मंदिर में हर दूर दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
कामाख्या मंदिर में हर दूर दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

कोविड से बचाव के लिये मंदिर के अंदर सैनिटाइजर रखा गया है।साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग पर खुद मुख्य पुजारी देवेंद्र पूरी नजर रखे हुए थे। उन्होंने बताया कि 2019 में लंबी लाइन अष्टमी के दिन लगी थी।इस बार कोरोना ने मानो भक्तों के पांव को घरों में ही रोक दिया हो

दुकानदार परेशान,बड़ी उम्मीद थी अष्टमी के दिन होगी भीड़
फूल नारियल बेचने वाले सौरभ ने बताया कि सुबह से 80 से 100 लोग आये हो तो बहुत है। नारियल चुनरी और फूल अष्टमी को ध्यान रखकर ज्यादा मंगवाया जाता है।नही बिकने पर बहुत नुकसान होगा।कोरोना के चलते बहुत से भक्त प्रसाद भी नही खरीद रहे है।मंदिर से कुछ दूरी पर संतोष पान की दुकान है।उन्होंने बताया दशकों से अष्टमी पर भीड़ होता देखते आ रहा हूं।पहली बार इतनी कम भीड़ दिखाई पड़ रही है।

मंदिर में
मंदिर के बाहर दुकान लगाने वाले भी श्रद्धालुओं के न आने से परेशान है। इससे उनकी रोजी रोटी पर असर पड़ा है।

अगस्त मुनि ने यही भगवान राम को कथा सुनायी थी

प्रमुख पुजारी देवेंद्र पूरी ने बताया कि सोने के मुकुट और मुखोटा लगाकर सौ गेंदे के फूलों के माला से श्रृंगार किया गया है। मंदिर का वर्णन भविष्य पुराण में मिलता है।अगस्त ऋषि ने यहां भगवान श्री राम को कथा सुनायी थी।यक्षों द्वारा मां का प्राण प्रतिष्ठा किया गया था। पूरे भारत मे सिर्फ दो ही जगह मां महामुद्रा यंत्र पर विराज मान है। पहला कमरु कामख्या असम और दूसरा यहां काशी में,मां वही की उप रूप है।जो भक्त वहां नहीं जा सकते उनको यही दर्शन करने से फल की प्राप्ति होती है।

मंदिर
मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु।


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नवरात्र में अष्टमी के दौरान कामाख्या मंदिर में दर्शन करते श्रद्धालु। पिछले साल महाष्टमी के मौके पर भारी भीड़ लगी थी लेकिन इस बार कोरोना की वजह से भीड़ नहीं दिखी।


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