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कोरोना संकट काल के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा की सात सीटों पर मंगलवार को सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है। मतदान केंद्रों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इस बीच मतदान केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा रहा है। मतदान केंद्र के अंदर मतदाताओं को भेजने से पहले कोविड प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्था की गई है और सभी मतदाताओं की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही मतदाता मतदाता केंद्र के अंदर जा पा रहे हैं।

24 लाख से ज्यादा वोटर करेंगे अपने मताधिकार प्रयोग

मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक चलेगा। हर बूथ पर अधिकतम एक हजार वोटर ही मतदान कर सकेंगे। इस वजह से हर मतदान केंद्र पर सहायक पोलिंग बूथ भी बनाए गए हैं। सात विधानसभा सीटों पर कुल 24,27,922 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिसमें 13,00684 पुरुष और 11,27108 महिला मतदाता हैं। साथ ही 130 थर्ड जेंडर है। 10 नवंबर को परिणाम आएंगे। पहली बार उप चुनाव में बसपा के अकेले उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है।

मतदान
मतदान के लिए आकर्षित करने की भी कवायद की कई है।

यूपी में बुलंदशहर सीट पर सबसे अधिक 18 उम्मीदवार

इस चुनाव में 88 उम्मीदवार मैदान में हैं। सर्वाधिक 18 उम्मीदवार बुलंदशहर सीट पर हैं। सबसे कम छह उम्मीदवार घाटमपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पहली बार भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर उर्फ रावण की आजाद समाज पार्टी का प्रत्याशी भी मैदान में है। निर्वाचन आयोग ने चुनाव को सकुशल संपन्न कराने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। मतदान केंद्रों पर भीड़ न होने पाए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए खास ख्याल रखा गया है। केंद्रों पर हैंड सैनिटाइजेशन की व्यवस्था भी रहेगी।

जौनपुर के मल्हनी में सुबह सात बजे वोट देने के लिए मतदाता पहुंच गए।
जौनपुर के मल्हनी में सुबह सात बजे वोट देने के लिए मतदाता पहुंच गए।

सात सीटों पर हो रहा है मतदान

यूपी में जिन 7 सीटों पर मतदान होना है उसमें 4 सीटों पर भाजपा और 1 सीट पर सपा विधायक के आकस्मिक निधन के बाद उनकी पत्नियां या पुत्र चुनावी मैदान में हैं। इन 7 सीटों में से 2017 में 6 भाजपा के खाते में गयी थी, जबकि एक सपा के खाते में थी। इन सीटों पर सबसे प्रमुख जौनपुर की मल्हनी सीट जिस पर बाहुबली धनंजय सिंह सपा और भाजपा को चुनती दे रहे हैं, जबकि उन्नाव की बांगरमऊ सीट भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर पर बलात्कार का आरोप सिद्ध होने पर खाली हुई है। इस सीट पर भी भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

उपचुनाव में वोटिंग शुरू
उपचुनाव में वोटिंग शुरू हो गई है। वोटिंग के लिए कानपुर की घाटमपुर विधानसभा में एक बूथ को काफी सजाया गया है।
मतदान
मतदान के दौरान मंगलवार सुबह पर हालांकि उस तरह की भीड़ नहीं दिखाई दी।

किन सीटों पर चुनाव है?

यूपी में इस समय 8 विधानसभा सीट खाली हैं। जिसमें से चुनाव आयोग के निर्देश के बाद 7 सीटों पर चुनाव हो रहा है। इन 7 सीटों में से 5 विधायकों के आकस्मिक निधन की वजह से खाली हुई है। जबकि एक सीट विधायक के आरोप सिद्ध होने पर और एक सीट विधायक के सांसद बनने की वजह से खाली हुई है। वहीं, 8वीं स्वार सीट पर अभी चुनाव नहीं घोषित किए गए हैं। .

विधानसभा सीट कौन था विधायक
घाटमपुर (कानपुर) कमल रानी वरुण (भाजपा)
मल्हनी (जौनपुर) पारस नाथ यादव (सपा)
बुलंदशहर सदर वीरेंद्र सिरोही (भाजपा)
टूंडला (फिरोजाबाद) प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल (भाजपा)
देवरिया सदर जन्मेजय सिंह (भाजपा)
बांगरमऊ (उन्नाव) कुलदीप सिंह सेंगर (भाजपा से अब निष्कासित)
नौगावां सादात (अमरोहा) चेतन चौहान (भाजपा)

कहां कितने प्रत्याशी मैदान में

विधानसभा सीट कहां कितने उम्मीदवार
घाटमपुर (कानपुर) 06
मल्हनी (जौनपुर) 16
बुलंदशहर सदर 18
टूंडला (फिरोजाबाद) 10
देवरिया सदर 14
बांगरमऊ (उन्नाव) 10
नौगावां सादात (अमरोहा) 14


इन सीटों पर 2017 में कितने फीसदी वोटिंग हुई थी?

विधानसभा सीट वोटिंग प्रतिशत
घाटमपुर (कानपुर) 61.90%
मल्हनी (जौनपुर) 60.04%
बुलंदशहर सदर 64.27%
टूंडला (फिरोजाबाद) 69.66%
देवरिया सदर 56.53%
बांगरमऊ (उन्नाव) 59.80%
नौगावां सादात (अमरोहा) 76.32%



जौनपुर की मल्हनी सीट पर बाहुबली की प्रतिष्ठा दांव पर

जौनपुर की मल्हनी सीट पर यूं तो सबसे ज्यादा बार कांग्रेस ने अपना झंडा लहराया है। लेकिन 90 के दशक के बाद उसका प्रभाव सीट पर कम होता गया। 2012-2017 के विधानसभा चुनावों में सपा के पारसनाथ यादव ने विजय हासिल की थी। क्षेत्र में उनकी पकड़ इतनी मजबूत मानी जाती थी कि लोग उन्हें पूर्वांचल का मिनी मुख्यमंत्री कहते थे। उनके दिवंगत होने के बाद अब उनके बेटे लकी यादव सहानुभूति वोटों के भरोसे हैं। उन्हें टक्कर दे रहे हैं निर्दलीय बाहुबली धनंजय सिंह...धनंजय सिंह खुद 2 बार यहां से विधायक रहे हैं। जबकि 2009 में खुद सांसद बने तो उपचुनावों में अपने पिता को जितवाया था। 2012 में अपनी पत्नी को उतारा तो वह हार गयी थी। 2017 में खुद पारसनाथ यादव के सामने उतरे तो बहुत करीबी मामला रहा। इस बार पारसनाथ यादव नहीं है। ऐसे में धनंजय सिंह पर सबकी नजर है।


यहां भाजपा सहानुभूति वोटों के भरोसे

  • नौगावां सादात: 2017 में पूर्व क्रिकेटर और भाजपा नेता चेतन चौहान ने इस सीट से भाजपा का झंडा फहराया था। बीते दिनों कोरोना के चलते उनकी मौत हो जाने के बाद सहानुभूति वोटों के लिए भाजपा ने उनकी पत्नी को टिकट दिया है। संगीता चौहान भी बखूबी क्षेत्र में इमोशनल कार्ड खेल रही हैं। हालांकि सपा से उन्हें टक्कर मिल रही है। लेकिन सपा को जातीय समीकरण की वजह से बसपा और कांग्रेस से ज्यादा ख़तरा है।
  • बुलंदशहर सदर: 2017 में यहां वीरेंद्र सिरोही ने भाजपा का परचम लहराया था। लेकिन आकस्मिक निधन के बाद उपचुनावों में उनकी पत्नी उषा सिरोही को मैदान में उतारा गया है। इसी सीट पर पहली बार भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण की आजाद समाज पार्टी भी लड़ रही है। लेकिन राजनैतिक पंडितों का मानना है कि जातीय समीकरण को देखते हुए भाजपा यहां से सीट निकाल सकती है।

यहां भाजपा की भाजपा से लड़ाई

  • देवरिया सदर: इस सीट पर 2017 में जन्मेजय सिंह ने भाजपा का झंडा लहराया थाञ लेकिन उनके आकस्मिक निधन के बाद भाजपा ने उनके बेटे अजय कुमार सिंह को टिकट नहीं दिया। अब अजय निर्दलीय ही मैदान में हैं। हालांकि 7 सीटों पर होने वाले उपचुनावों में देवरिया इकलौती ब्राह्मण बाहुल्य सीट है। यहां 29 साल से कोई ब्राह्मण कैंडिडेट भी नहीं चुना गया है। अब चारों प्रमुख पार्टियों ने त्रिपाठियों को टिकट दिया है। यूपी की राजनीति में इस समय ब्राह्मण को लेकर जबरदस्त राजनीति भी चल रही है। ऐसे में यह सीट तय करेगी कि ब्राह्मण किसके साथ है। हालांकि यहां भाजपा को भितरघात का खतरा है।
  • उन्नाव की बांगरमऊ सीट: 2017 में इस सीट पर पहली बार भाजपा का कमल कुलदीप सिंह सेंगर ने खिलाया, लेकिन बलात्कार का मामला कोर्ट में सिद्ध होने पर कुलदीप को यह सीट छोड़नी पड़ी। कुलदीप सेंगर के समर्थकों को उम्मीद थी कि भाजपा यहां उनकी पत्नी को टिकट देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में सभी की निगाहे इस सीट पर टिकी है। दरअसल, सभी जानते है कि कुलदीप सेंगर के सार्थक भाजपा से नाराज हैं। जिसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है।
  • कानपुर की घाटमपुर सीट: इस सीट पर कमला रानी ने पहली बार भाजपा का झंडा लहराया था, लेकिन उनके निधन के बाद खाली हुई सीट पर उनकी बेटी को भाजपा ने टिकट ना देकर कमला रानी के समर्थकों में रोष पैदा कर दिया है। बताया जाता है कि सीट पर पहली लड़ाई भाजपा की भाजपा से है, फिर सपा से। ऐसे में सवाल यह है कि क्या भाजपा नेतृत्व अपनी जीत को बरकरार रख पाएगा?

टूंडला विधानसभा सीट पर सभी प्रत्याशी हैं बाहरी

फिरोजाबाद में टूंडला सीट से विधायक रहे एसपी बघेल के सांसद बनने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। टूंडला सीट जहां कांग्रेस का पर्चा खारिज हो गया है। वहीं, इस सीट पर तीन प्रमुख पार्टियों के कैंडिडेट बाहरी हैं। बहरहाल, जानकार बताते हैं कि टूंडला सीट से 2017 में निर्वाचित विधायक एसपी बघेल को भाजपा ने मंत्री पद दिया, फिर लोकसभा का टिकट भी दिया। ऐसे में हर स्तर पर टूंडला सीट को भाजपा में महत्व मिला है। 1996 के बाद भाजपा ने 2017 में इस सीट पर जीत का परचम लहराया था। इसलिए भाजपा इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत से लगी है। भाजपा प्रत्याशी प्रेम पाल धनगर भी आगरा के रहने वाले हैं। वह इस सीट के बघेल, ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्य वोटों के भरोसे जीत हासिल करना चाहते हैं। भाजपा इस उप चुनाव को मुख्य चुनाव की तरह लड़ रही है।



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यह फोटो कानपुर की है। यहां घाटमपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव है। आज सुबह सात बजे से कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान शुरू हो गया। हालांकि सुबह मतदाताओं की संख्या कम देखी जा रही है।


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