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शहीद जवान अनिल सिंह तोमर का पार्थिव शरीर मंगलवार की रात 9 बजे मेरठ स्थित उनके पैतृक गांव सिसौली लाया गया। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे लोगों ने अनिल तोमर जिंदाबाद, भारत माता की जय के नारे लगाए। यह क्षण परिवार को गौरव की अनुभूति करा रहा था। जब लोग जयघोष करते तो शहीद के पिता भोपाल सिंह के चेहरे पर चमक आ जाती थी, लेकिन अगले ही पल उनकी आंखों से आंसू बहने लगते थे। अनिल तोमर को उनके आठ साल के बेटे ने मुखाग्नि दी।

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गन्ना मंत्री ने शव को दिया कंधा

अनिल के अंतिम संस्कार में हजारों लोग मौजूद रहे। शहीद जवान को भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। देर रात करीब 11 बजे राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ शहीद अनिल तोमर का अंतिम संस्कार किया गया। सरकार ने जहां शहीद के परिवार को 50 लाख की आर्थिक मदद की, वहीं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा भी किया है। इसके अलावा एक सड़क का नाम अनिल तोमर के नाम पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में गन्ना मंत्री सुरेश राणा और सांसद राजेंद्र अग्रवाल शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

शहीद जवान को पुष्प चक्र अर्पित करते हुए सांसद राजेंद्र अग्रवाल।

आतंकियों के छिपे होने की मिली थी खबर

गांव सिसौली निवासी अनिल कुमार तोमर भारतीय थलसेना की 44वीं राष्ट्रीय राइफल्स में बतौर घातक प्लाटून हवलदार के पद पर तैनात थे। बीते शनिवार को दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के कनीगाम गांव में आतंकवादियों के छिपे होने की खबर मिलने पर एक ऑपरेशन चलाया गया था।

शहीद अनिल तोमर।

इसी बीच आतंकवादियों और सैनिकों की मुठभेड़ हो गई। आतंकियों की ओर से की गई फायरिंग में हवलदार अनिल कुमार गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए श्रीनगर स्थित 92 बेस अस्पताल भेजा गया था। जहां इलाज के दौरान उन्होंने सोमवार की सुबह अंतिम सांस ली। करीब 40 साल के शहीद अनिल तोमर अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए हैं।



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यह फोटो मेरठ की है। गन्ना मंत्री ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया।


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