सोमवती अमावस्या के दिन गंगा, तालाब, कुंडों में स्नान का विधान होता है। इस दिन महिलाएं संतान और पति की लंबी उम्र की कामना से व्रत रखती है। पीपल के वृक्ष की पूजा भी करती है। सोमवार को अमावस्या पड़ने के कारण इस दिन को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। कोविड 19 के चलते काशी के गंगा घाटों पर स्नान, दान करने वालों की भीड़ में काफी कमी देखने को मिल रही है।
पूर्वजों के आत्मा की शांति के लिए दान-पुण्य किया जाता है
आचार्य राम शास्त्री ने बताया कि सोमवार महादेव का अति प्रिय दिन है। इस दिन अमावस्या पड़ने के कारण पौराणिक महत्व के अनुसार जलाशय में स्नान का विधान है। इस दिन पितरों के तर्पण करने से आशीर्वाद मिलता है। गंगा जल में डुबकी लगाकर सूर्य को अर्घ्य देने से सुख- समृद्धि का पुण्य फल प्राप्त होता है।
व्रती महिलाएं पीपल के पेड़ में धागा बांधकर संतान और पति के लंबी उम्र की कामना करती है। पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु, तने में भगवान शिव और अग्रभाग में ब्रह्मा का वास होता है। गायत्री मंत्र के पाठ से भगवान जल्द प्रसन्न होते है। मार्ग शीर्ष कृष्ण पक्ष में अमावस्या 12:45 रात्रि पर लगा जो सोमवार 14 दिसंबर को रात्रि 9:47 तक रहेगी।
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