उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर जिले का जेल प्रशासन विवादों से घिर गया है। दरअसल, यौन शोषण के दोषी आसाराम के लखनऊ आश्रम से आए अनुयायियों ने जेल में कैदियों को कंबल बांटे। इसकी जानकारी होने पर पीड़ित के पिता कड़ी आपत्ति जाहिर की है। वहीं, मामले को तूल पकड़ता देख जेल प्रशासन ने चुप्पी साध ली है।
शाहजहांपुर की रहने वाली है पीड़ित
दरअसल, लखनऊ स्थित आसाराम के आश्रम से शाहजहांपुर की जेल में कंबल भेजे गए थे। सर्दी ज्यादा होने के कारण कंबल को बंदियों में वितरण करना था। कंबल बांटने के लिए आसाराम के कुछ समर्थक भी जेल के अंदर कंबल बांटने गए थे। लेकिन जेल प्रशासन भूल गया था कि, आसाराम 2013 में शाहजहांपुर की एक छात्रा से यौन शोषण के आरोप में जेल भेजे गए थे। साल 2018 में कोर्ट ने उनको दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उसके बाद बावजूद जेल के अंदर आसाराम की फोटो लगाकर बंदियों को कंबल वितरण किया गया।
प्रकरण में गवाह की हत्या के आरोपियों से बंटवाए कंबल
हैरत की बात ये है कि, जेल प्रशासन ने प्रेस नोट जारी कर सरकारी कार्यक्रम बना दिया। प्रेस नोट में बताया गया कि, लखनऊ स्थित आसाराम बापू आश्रम की तरफ से कंबल भेजे गए हैं। अर्जुन और नारायण पांडेय उर्फ पुष्पेंद्र पांडेय के सौजन्य से कंबल वितरण किया गया है। जबकि जिस जेल में कंबल वितरण किया गया उसी जेल के अंदर आसाराम प्रकरण में गवाह की हत्या के आरोप में अर्जुन और नारायण पांडेय उर्फ पुष्पेंद्र पांडेय जेल में बंद रह चुका है और इस वक्त जमानत पर बाहर है।
सोशल मीडिया से हटाई गई फोटो
जेल के अंदर बांटे गए कंबल का प्रेस नोट और फोटो वायरल होने के बाद शाहजहांपुर में रहने वाली पीड़िता के पिता ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इस प्रकरण की जांच की मांग की है। हालांकि सोमवार देर शाम प्रेस नोट और फोटो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा तो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों से फोटो डिलीट कर दी गई।
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