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उत्तर प्रदेश में कानपुर के बिकरु गांव में 2/3 जुलाई की रात गैंगस्टर विकास दुबे व उसे गुर्गों ने सीओ देवेंद्र मिश्र समेत 8 पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले की जांच कर चुकी SIT (स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम) ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। कहा गया कि कुख्यात अपराधी विकास दुबे के यहां दबिश देने के दौरान मानकों को ताक पर रखा गया। ऐसे में पुलिसकर्मियों को प्रोफेशन तरीकों के साथ बेहतर ट्रेनिंग देने की जरूरत है। SIT ने पुलिस-प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही पुलिसिंग में बदलाव की सिफारिश व सुझाव दिया है। जिस पर शासन गंभीर है। जल्द ही कानपुर के साथ-साथ UP की पुलिस में कई प्रशासनिक सुधार देखने को मिल सकते हैं।

ट्रेंड दबिश टीम बने, निशाना अचूक बनाने के लिए फायरिंग रेंज में अभ्यास जरूरी
SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि पुलिसकर्मियों का निशाना अचूक हो सके, इसके लिए संसाधन भी जुटाने होंगे। उनके लिए फायरिंग रेंज और वहां लगातार अभ्यास बहुत जरूरी है। थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, अपराधियों का ब्योरा लगातार अपडेट किए जाने, अभियोजन स्वीकृति के मामले में निर्णय की प्रक्रिया तेज करने का सुझाव SIT ने दिया है।

जांच टीम ने बिकरु कांड में पुलिस के द्वारा दबिश देने के दौरान की जाने वाली तैयारियों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सुझाव दिया है कि विकास दुबे जैसे कुख्यात अपराधी के यहां पर दबिश देने के दौरान मानकों को ताक पर रख दिया गया और नियमों का पालन नहीं किया गया। जिसका नतीजा बेहद खतरनाक रूप ले कर सामने आया था। पुलिस को दबिश देने से पहले पूरी तैयारी के साथ व प्रोफेशनल तरीकों से जाना चाहिए। लेकिन इसके लिए पुलिस को बेहतरीन ट्रेनिंग की जरूरत है। इसके लिए ट्रेंड दबिश टीम भी अलग से बनाई जानी चाहिए।


न्याय क्षेत्राधिकार में भी होना चाहिए बदलाव

SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह भी बताया है कि बिकरु कांड में एक बात भी निकल कर सामने आई की घटनाक्रम कानपुर नगर के थाने के अंतर्गत हुआ और न्यायिक क्षेत्राधिकार कानपुर देहात में आ रहा था। इससे भी अभियुक्त विकास दुबे को तकनीकी लाभ मिलता रहा। SIT ने सिफारिश की है कि यदि प्रदेश के किसी अन्य जिले में भी यदि ऐसी स्थिति हो तो उसमें बदलाव किया जाए। जिस जिले का थाना हो, वह उसी जिले की अदालत के अधीन रहना चाहिए।


क्या बोले अधिवक्ता?
अधिवक्ता राहुल सिंह ने बताया कि SIT ने जो सुझाव दिए हैं, उस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। रही बात न्याय क्षेत्राधिकार की तो जब कानपुर देहात जिला बना और फिर कोर्ट ट्रांसफर हुई तो उस समय भी यह मुद्दा वकीलों के द्वारा उठाया गया था। कानपुर नगर के अंतर्गत आने वाले सभी थानों मुकदमों की सुनवाई कानपुर नगर में ही होनी चाहिए। अगर SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट में अगर यह बात कही है, तो बेहद जरूरी है कि न्याय क्षेत्राधिकार में भी परिवर्तन होना चाहिए।

शूटआउट के सभी आरोपियों पर पुलिस ने इनाम घोषित किया था। ये सभी पकड़े जा चुके हैं।

क्या था बिकरु कांड?
चौबेपुर थाना के बिकरु गांव में 2 जुलाई की रात गैंगस्टर विकास दुबे और उसकी गैंग ने 8 पुलिसवालों की हत्या कर दी थी। अगली सुबह से ही यूपी पुलिस विकास गैंग के सफाए में जुट गई। 9 जुलाई को उज्जैन के महाकाल मंदिर से सरेंडर के अंदाज में विकास की गिरफ्तारी हुई थी। 10 जुलाई की सुबह कानपुर से 17 किमी पहले पुलिस ने विकास को एनकाउंटर में मार गिराया था। इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी विकास दुबे समेत छह एनकाउंटर में मारे गए।

योगी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए SIT बनाई थी। अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी इसके अध्यक्ष थे। उन्होंने 16 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। 3100 पन्नों की रिपोर्ट में SIT ने पुलिस, प्रशासन, राजस्व, खाद एवं रसद विभाग के करीब 90 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ प्रशासनिक व पुलिस व्यवस्था में सुधार की सिफारिश की है।



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9 जुलाई को उज्जैन के महाकाल मंदिर से सरेंडर के अंदाज में विकास की गिरफ्तारी हुई थी। 10 जुलाई की सुबह कानपुर से 17 किमी पहले पुलिस ने विकास को एनकाउंटर में मार गिराया था।- फाइल फोटो


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