उत्तर प्रदेश में वाराणसी के बड़ा गणेश इलाके में गुरुवार देर शाम बंदरों के हमले से बचने के लिए छत से छलांग लगाने से मौत हो गई। बताया जा रहा हैं कि युवा सीए कंचन कुशवाहा छत पर किसी काम से गए थे, तभी बंदरों के झुंड ने उनको घेर लिया। बचने के लिए छत से सीढ़ी की ओर भागे लेकिन दर्जनों बंदरों ने रास्ता रोक लिया। जान बचाने के लिए वो बगल के छत पर कूदने की कोशिश में गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गये। परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया जहा डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
दो वर्ष पूर्व सिगरा में इनके डर से छत से गिर कर एक मासूम अपनी जान गवां बैठा था।इसी तरह अर्दली बाजार के एक बुजुर्ग के ऊपर भी इन उत्पाती बंदरों ने दीवार गिरा दी थी और वो भी करीब 15 दिन मौत से जंग लड़कर जिंदगी की जंग हार गए थे।
छत में फैले कपड़े फाड़ देना, बच्चों को दौड़ा लेना, छत पर लगे पौधों को तोड़ देना, घर मे घुस कर फ्रिज और किचन से खाना आदि लेकर भाग जाना इन खुराफाती बंदरों की आदत में शुमार है। नगर निगम ने मथुरा से एक टीम बुलाई थी, जिसको 300 रुपए प्रति बन्दर की दर से भुगतान किया गया था और वो अभियान सफल नहीं साबित हुआ था।
बंदरों को नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा गया था
बंदरों ने नक्सल क्षेत्र में तैनात PAC के जवानों के कैम्प पे धावा बोल उनका जीना मुहाल कर दिया था । साथ ही आसपास के गांववालों को भी परेशान कर दिया था। हालात यह हो गए थे की चंदौली जिला प्रशासन ने वाराणसी नगर निगम की किसी भी गाडी के चंदौली की सीमा में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। और इसके साथ ही यह अभियान धाराशायी हो गया था। तब से इन बंदरों की तादात में बेतहाशा इजाफा हो चूका है ।
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