राजधानी लखनऊ में जमीन हड़पने के लिए एक 35 साल के शख्स को अगवा करने के बाद जमकर पीटा गया और उसे जंगल में फेंक दिया। करीब 12 घंटे बाद लावारिस हालत में मिलने के बाद उसे पीएचसी से लेकर मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर ले जाया गया, लेकिन पहले कोरोना जांच के कराने के नाम पर उसे इलाज नहीं मिला। परेशान होकर परिवार वाले उसे एक निजी अस्पताल ले गए। जहां आज सुबह उसकी मौत हो गई। परिवार वालों ने तीन लोगों के खिलाफ तहरीर दी है। साथ ही पुलिस पर आरोप लगाया कि यदि पुलिस सूचना देने के बाद सक्रिय हो जाती और समय पर इलाज मिल जाता तो युवक की मौत नहीं होती।
पीड़ित परिवार को दौड़ाती रही बंथरा पुलिस, नहीं हुई सुनवाई
बंथरा थाना क्षेत्र के खटोला ग्राम में रहने वाले 35 वर्षीय नेहरू को बुधवार सुबह 11 बजे गांव के 4-5 लोग जबरन अपने साथ ले गए। परिवार के लोग दिन भर उसे ढूंढते रहे। लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। रात 11 बजे नेहरू अचेत अवस्था में माती के जंगल में पड़ा मिला। सूचना पाकर पहुंचे परिवार वाले नेहरू को बंथरा थाने गए। जहां पुलिस उन्हें कभी मुंशी के पास तो कभी दरोगा के पास तो कभी कार्यालय में इधर-उधर दौड़ाती रही।
काफी देर बाद एक होमगार्ड के साथ मरणासन्न नेहरू को सरोजनीनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। जहां उसे इलाज नहीं मिला। परिवार वाले नेहरू को मेडिकल कॉलेज ट्रामा सेंटर ले गए, जहां कहा गया कि पहले कोरोना की जांच कराओ, उसकी रिपोर्ट आने के बाद भर्ती किया जाएगा। इस पर परिवार के लोग नेहरू को अर्जुनगंज फिर मोहनलालगंज के कल्ली पश्चिम-हरकंद गढ़ी स्थित एक प्राइवेट अस्पताल से लेकर ट्रामा सेंटर ले गए। जहां गुरुवार सुबह नेहरू ने दम तोड़ दिया।
दामाद ने लगाए गंभीर आरोप
नेहरू के दामाद राहुल के अनुसार उनके ममिया ससुर को जहर पिलाया गया और पीटा गया, जिससे उनकी मौत हुई है। परिवार वालों का आरोप है कि अगर बंथरा पुलिस लापरवाही न बरतती और समय पर इलाज मिल जाता तो नेहरू की जान बच सकती थी। नेहरू के अपहरण और उसकी मौत के लिए परिवार के लोगों ने खटोला गांव के ही 3 लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इन लोगों ने जबरन नेहरू से 4 बीघा जमीन लिखा ली है। नेहरू की मौत की सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर बंथरा अस्पताल पहुंच गए हैं।
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