पूर्वांचल के मिनी मुख्यमंत्री के नाम से पहचाने जाने वाले पारसनाथ यादव की मौत के बाद मल्हनी विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। हालांकि यह सीट यादव बाहुल्य है, लेकिन पिछले 2 चुनावों से प्रयासरत बाहुबली धनंजय सिंह ने निर्दलीय मैदान में उतरकर चुनाव को फंसा दिया है। इलाके में रोबिनहुड की छवि बनाए धनंजय सिंह आजकल गली-गली वोटरों को रिझाने के लिए घूम रहे हैं। दरअसल, उन्हें उम्मीद है कि 2017 चुनाव जब वह पारसनाथ यादव के रहते हुए दूसरे नंबर पर आए थे, तब अबकी बार ज्यादा चांस है। बहरहाल, लड़ाई में धनंजय के साथ साथ सपा और भाजपा भी बनी हुई है। हालांकि नतीजा किसके पक्ष में आयेगा यह 10 नवंबर को रिजल्ट आने पर पता चलेगा।
क्यों है निर्दलीय धनंजय सिंह की मजबूत दावेदारी?
2012 में गठित हुई मल्हनी सीट पूर्व में रारी सीट से जानी जाती थी। 2009 में परिसीमन के बाद इसमें कुछ यादव बाहुल्य इलाके जोड़े गए और नया नाम मल्हनी पड़ा। रारी सीट से धनंजय सिंह लगातार 2 बार खुद विधायक रहे। 2009 में बसपा से सांसद बनने के बाद अपने पिता को उपचुनाव जिताया। 2012 में मल्हनी सीट बनने के बाद जब धनंजय ने अपनी पत्नी को मैदान में उतारा तो सामने पारसनाथ यादव थे। जानकर बताते हैं कि सपा की चली आंधी, क्षेत्र पर मजबूत पकड़ और यादव बाहुल्य इलाका होने के चलते पारसनाथ यादव चुनाव जीत गए। 2017 में धनंजय सिंह फिर लौट और खुद चुनाव लड़े। मामला काफी करीबी रहा और वे दूसरे नंबर पर रहे। इस बार पारसनाथ यादव नहीं हैं, ऐसे में जानकारों का मानना है कि क्षेत्र में मजबूत पकड़ के चलते धनंजय सिंह बाजी मार सकते हैं।
सपा की दावेदारी मजबूत लेकिन सहानुभूति वोटों के है भरोसे
जौनपुर की मल्हनी सीट का समाजवादी पार्टी के अंदर शुरू से एक बहुत बड़ा स्थान रहा है। इसके पीछे की मुख्य वजह समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी लकी यादव के पिता पूर्व विधायक पारसनाथ यादव हैं। जिनकी पकड़ समाजवादी पार्टी के अंदर इतनी बड़ी थी कि उन्हें पूर्वांचल में मिनी मुख्यमंत्री के नाम से भी जाना जाता था और सबसे खास बात यह थी कि मुलायम सिंह यादव के सबसे विश्वासपात्र नेताओं में से एक थे। जिसका जीता जाता उदाहरण 2017 में उस वक्त देखने को मिला जब मुलायम सिंह यादव ने सिर्फ दो सीट पर चुनाव प्रचार किया था, जिनमें एक सीट मल्हनी थी। उन्होंने पारसनाथ के लिए वोट मांगा था। अब ऐसे में पिता के कद को बनाए रखने के लिए लकी यादव को घर की राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पिता के साथ चलने वाली जनता को साथ में लेकर चलना है और चुनाव जीतकर पिता की कड़ी मेहनत से बनाई गई राजनीतिक विरासत को बचाना भी है।
| पार्टी | प्रत्याशी |
| भाजपा | मनोज सिंह |
| सपा | लकी यादव |
| बसपा | जय प्रकाश दुबे |
| कांग्रेस | राकेश मिश्रा |
| निर्दलीय | धनंजय सिंह |
यह उपचुनाव कहीं ना कहीं लकी यादव का राजनीतिक भविष्य में आगे के लिए तय करने वाला है। जिसको लेकर लकी यादव प्रत्याशी के रूप में घर घर जा मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में जुटे हुए हैं तो वहीं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता भी अपनी सीट को बचाने के लिए रात-दिन एक कर रहा है। हालांकि जानकर मानते है कि सपा मल्हनी में सहानुभूति वोटों के भरोसे ज्यादा है और सबसे खास बात की यदि अखिलेश यादव एक रैली कर दे तो जीत पक्की मानी जा रही है।
इसलिए भाजपा पड़ रही है कमजोर
मल्हनी सीट पर जीत उसी की होती है जिसके पास यादव वोट के साथ कुछ अन्य जातियों के वोट हों। इस उपचुनाव को देखे तो इस सीट पर कुल मतदाता 3,62,365 है। जबकि यादव लगभग 90 हजार के आसपास हैं और ठाकुर 50 हजार के आसपास हैं। भाजपा ने ठाकुर कैंडिडेट मनोज कुमार सिंह, सपा ने लकी यादव, कांग्रेस और बसपा ने ब्राह्मण कैंडिडेट उतारे हैं। जबकि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में धनंजय सिंह मैदान में है। ऐसे में ठाकुर वोटों में विभाजन तय है। चूंकि धनंजय इस क्षेत्र का पहले भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऐसे में जानकार कहते है कि धनंजय को अन्य जातियों का सपोर्ट भी मिल सकता है। अगर सपा कमजोर पड़ी तो भाजपा का भी मजबूत होना मुश्किल है।
कोई नुक्कड़ सभाएं कर रहा है तो कोई चुनाव चिन्ह साथ लेकर घूम रहा
भाजपा ने मल्हनी सीट जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। बुधवार को डिप्टी सीएम केशव मौर्य की रैली है। इससे पहले भाजपा कैंडिडेट घोषित होने से पहले सीएम योगी खुद दौरा कर चुके हैं। आगामी दिनों में भी उनकी रैली लगी हुई है। जबकि सपा से स्थानीय और प्रदेश स्तर के नेता कैम्पेनिंग और नुक्कड़ सभाएं कर रहे हैं। हालांकि क्षेत्र के लोगों को अखिलेश यादव की रैली का इंतजार है। लेकिन अखिलेश के मल्हनी पहुंचने के चांसेस कम ही हैं। वहीं कांग्रेस और बसपा के भी राष्ट्रीय नेताओं ने इस सीट के साथ साथ पूरे उपचुनाव से दूरी बना रखी है। वहीं धनंजय सिंह अपने साथ अपना चुनाव चिन्ह गैस सिलेंडर लेकर घर घर घूम रहे हैं।
क्या है जातिगत आंकड़ा?
| जाति | संख्या |
| यादव | 90 हजार |
| क्षत्रिय | 50 हजार |
| ब्राह्मण | 40 हजार |
| मुस्लिम | 35 हजार |
| दलित | 55 हजार |
| निषाद | 25 हजार |
| अन्य | 67365 |
क्षेत्र बढ़ा तो नाम बदलता रहा
आज की मल्हनी सीट 1951 में जौनपुर दक्षिण विधानसभा सीट के नाम से जानी जाती थी। 1957 में सीट का नाम रारी हुआ और यह नाम 2009 तक चला। 2012 में मल्हनी विधानसभा सीट हो गया। इस सीट पर सभी प्रमुख राजनैतिक दलों ने झंडा फहराया है तो निर्दल भी इस सीट की शान राह चुके हैं।
अब तक हुए चुनाव में कितनी बार कौन जीता
| पार्टी | कितनी बार हुई जीत |
| कांग्रेस | 06 |
| भाजपा | 00 |
| जनसंघ | 01 |
| भारतीय क्रांति दल | 01 |
| जनता पार्टी | 01 |
| लोकदल | 01 |
| सपा-बसपा गठबंधन | 01 |
| बसपा | 01 |
| जदयू-भाजपा गठबंधन | 01 |
| सपा | 04 |
| निर्दलीय | 2 |
| जनता दल | 01 |
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