मथुरा के नंदगांव के नंदबाबा मंदिर में रविवार को दो मुस्लिम युवकों ने नमाज पढ़ी थी। इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों और संतों में गुस्सा है। फैजल नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले पर दैनिक भास्कर ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी से बात की तो उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड ऐसे मामलों पर अपना बयान जारी नहीं करता है। उन्होंने कहा मेरा व्यक्तिगत मानना है कि यदि इजाजत लेकर मंदिर परिसर में नमाज पढ़ी गयी है तो नमाज पढ़ना जायज है।
इजाजत लेकर पढ़ी नमाज तो जायज
जिलानी ने कहा कि पहले भी ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जब अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों में आपसी सौहार्द के लिए नमाज पढ़ी गयी है। उन्होंने कहा मैंने मीडिया के जरिए जाना है कि युवकों ने बताया भी कि उन्होंने मंदिर प्रशासन से इजाजत लेकर परिसर में नमाज पढ़ी है। ऐसे में इसे गलत नहीं ठहराया जा सकता।
बदले की भावना से किया गया हनुमान चालीसा का पाठ
इस एक्शन के रिएक्शन में मथुरा और आगरा के कुछ धर्मस्थलों में कहीं भगवा रंग पोता गया तो कहीं हनुमान चालीसा भी पढ़ी गयी? इस सवाल पर जफरयाब जिलानी कहते हैं कि यह जबरदस्ती किया गया काम है। जिसे सही नहीं ठहराया जा सकता है। यह सिर्फ बदले की भावना से किया गया काम है।
मुनव्वर का बयान सही नहीं
फ्रांस मामले पर शायर मुनव्वर राना के बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर मैं वहां होता तो वही करता जो उस आतंकी ने किया, इस पर जफरयाब जिलानी ने कहा कि मुझे मुनव्वर राना का पूरा बयान नहीं पता है। मीडिया के साथियों के द्वारा जो बयान पता चला है उसे मैं सही नहीं ठहराता हूं। उन्होंने कहा कि इस्लाम किसी बेकसूर को सजा देने के हमेशा से ही खिलाफ रहा है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3l5Ciks