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उत्तर प्रदेश में अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट जहां 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन से राम मंदिर के लिए देश व्यापी धन संग्रह अभियान शुरू करने की तैयारी में जुटा है। मंदिर के मुख्य आर्किटेक्ट निखिल सोमपुरा ने बताया कि कोशिश यह भी हो रही है कि मकर संक्रांति से ही राम मंदिर की नींव का काम भी शुरू कर दिया जाए। पूरे मंदिर के 2.7 एकड़ की खुदाई कर नींव का प्लेटफार्म किया जाएगा। इसके लिए पत्थरों की भी व्यवस्था इसी के साथ करनी है।

सोमपुरा के मुताबिक, राम मंदिर की नींव मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरों की बनेगी। जबकि मुख्य मंदिर, इसके कार्यशाला में तराश कर रखे भरतपुर (राजस्थान )के पत्थरों से बनेगा। ग्राउंड फ्लोर के पत्थर तराश कर तैयार हैं। जिससे नींव के निर्माण के बाद मंदिर का काम शुरू हो जाएगा। मंदिर के बेस का प्लेटफार्म नींव के प्लेटफार्म से 20 फीट ऊंचा होगा।

मंदिर की गहराई 30 से 50 फीट तक हो सकती है
सोमपुरा के मुताबिक, अगर मिर्जापुर के पत्थरों व मंदिर के नींव के 2.7 एकड़ क्षेत्र का परीक्षण समय से पूरा हो गया तो मंदिर की नींव निर्माण का काम मकर संक्रांति से शुरू हो सकता है। जिसको लेकर एल एंड टी ,व टीसीएस तैयारी कर रही हैं।

मंदिर स्थल की खुदाई से पहले जमीन का परीक्षण नए सिरे से करके इसकी डिजाइन भी इसी बीच तैयार कर ली जाएगी। मिर्जापुर खदान के पत्थरों से पूरे मंदिर क्षेत्र की नींव का प्लेटफार्म तैयार होगा। जिसकी गहराई इसके परीक्षण के बाद तय होगी। जोकि 30 फीट से 50 फीट तक हो सकती है।

हैदराबाद भू अनुसंधान केंद्र से जल्द मिलेगी रिपोर्ट

उन्होंने बताया कि मंदिर इलाके में सरयू की धारा व भुरभुरी रेत की परत की जो रिपोर्ट टेस्ट पिलर्स की पाइलिंग के दौरान एल एंड टी ने दी है। उसको लेकर मंदिर परिसर का भू परीक्षण भी राष्ट्रीय भू अनुसंधान संस्थान हैदराबाद की टीम करके अपनी रिपोर्ट देगी। लेकिन इसका मंदिर निर्माण व नींव के निर्माण की तकनीक से कोई लेना-देना नहीं है। बताया गया कि राम मंदिर की नींव की खुदाई का काम अब यहां के खुदाई स्थल के तकनीकी सर्वे के बाद शुरू हो जाएगा।



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राम मंदिर की नींव मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरों की बनेगी जबकि मुख्य मंदिर, इसके कार्यशाला में तराश कर रखे भरतपुर (राजस्थान ) के पत्थरों से बनेगा।


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